किसने, किससे कहा

 किसने, किससे कहा

क्या इस सूत के बँटे हुए धागे से तुम लोगों ने कुच्छ सिखी?
बूढ़े आदमी आपने सात बेटों से कहा

वह कौन सी चीज है जो हमेशा घाटी रहती है
राजा ने सेठ से कहा

अच्छी बात है, माई! अब मैं चलता हूँ । देरी होने से खतरा है
बाँदी ने पन्ना दाई से कहा

चटपटे के लिए तो मैं रामबाण की तरह दौड़ सकता हूँ
बिहारी ने कंचन से कहा

तुमने अच्छा काम किया है। तुम्हारे मेहमानों का दवात मैं करूंगा
नारायण का बाप ने नारायण से कहा

आज से सब इसका बहिष्कार करो
एक कैदी ने वार्डर से कहा

इस रुपये से तुम क्या करेगा
नारायण की बहन तारा ने नारायण से कहा

तुम लोगों की झूठ बोलने की आदत होती हैं
विजयबहदुर ने मुरलीयवाला से कहा

क्या तुम्हारा माँ-बाप नहीं है? अभी से भीख क्यों मांगते हो?
नारायण ने भिक्षुक लड़का से कहा

हम पीढ़ी दर पीढ़ी राजाओं की सेवा करते आ रहे हैं। हमने कभी विश्वासघात नहीं किया है
बाँदी ने पन्ना दाई से कहा

मैं पागल नहीं हूँ। मेरा अकल ठिकाने है।
वार्डर ने जेलर से कहा

अब इस बार ये पैसे न लूँगा
मिठाईवाला ने रोहणी से कहा

हमें पसन्द है। हम तीनों खिलौने खरीदेंगे
राजा भोज ने कारीगर से कहा

अधिक सजा क्यों चाहते हो
सुपरिन्टेंडेंट ने वार्डर से कहा

मौके की सहायता अनमोल होती है
भारतेन्दु ने अपना मित्र से कहा

माँ नहीं है बाबू। वह तो मुझे बहुत बचपन मे ही छोर कर मर गई
भिक्षुक लड़का ने नारायण से कहा

जब इतना बताया है, तब और भी बता दो, मैं बहुत उत्सुक हूँ
दादी ने मिठाईवाले से कहा

जरा तुम्ही देखो, मुझे तो तीनों एक जैसे दिखाई देते हैं हो सकता है मेरी ही भूल हो
राजा भोज ने दरबारियों से कहा

इतना नीच काम तुमने किया, क्या मिला
एक कैदी ने वार्डर से कहा

मेरी अक्ल ठिकाने है
वार्डर ने जेलर से कहा

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